बदतमीज़ की बदतमीज़ी-2
बदतमीज़ की बदतमीज़ी-2 प्रेषक : बदतमीज़ मुझसे है तेरी शत्रुता तो जान मेरी जान ले। बस याचना है एक तूँ इस याचना को मान ले। बन्दूक रख दे फेंक अब ये हाथ से तलवार दे। इस लाल लँहगे में मुझे अब ढाँक कर तूँ मार दे। दूरी बहुत तड़पा रही है किस तरह इसको सहूँ। … Read more