हुई चौड़ी चने के खेत में -2
हुई चौड़ी चने के खेत में -2 लेखक : प्रेम गुरु प्रेषिका : स्लिमसीमा (सीमा भारद्वाज) प्रथम भाग से आगे : “क्या उसने तुम्हारी कभी ग… गां… मेरा मतलब है…!” मैं कहते कहते थोड़ा रुक गई। “हाँ जी ! कई बार मारते हैं।” “क्या तुम्हें दर्द नहीं होता ?” “पहले तो बहुत होता था पर … Read more