महकती कविता-3
महकती कविता-3 महकती कविता-1 महकती कविता-2 कविता ने लण्ड को फिर से मसलना शुरू कर दिया। रोहण को फिर से तरावट आने लगी। ‘अरे चुद तो गई, अब क्या करना है…?’ ‘तुम्हारा सारा दम निकालना है… आज मेरी सुहागरात समझो… कुछ ना छोड़ो… बस अपना माल निकालते रहो। देखूँ तो जरा कितना दम है?’ ‘अरे … Read more