पाठिका संग मिलन-5
पाठिका संग मिलन-5 मैं घूमकर उसके सामने आ गया उसके नुकीले उभारों के बीच। अभी तक हम अगल बगल बैठे थे। वह अपने वक्ष को ढकने लगी, मैंने उसकी कलाइयाँ पकड़कर लीं। उसके दोनों उरोज अजब चालू सी नुकीली डिजाइन के कपों में बंद थे और यूँ अलग अलग थे जैसे दो सहेलियाँ एक-दूसरे से … Read more