एक भाई की वासना -17
एक भाई की वासना -17 सम्पादक – जूजा जी हजरात आपने अभी तक पढ़ा.. जाहिर के जिस्म से चिपकी हुई उसकी चमड़ी के रंग की लेग्गी ऐसी ही लग रही थी.. जैसे कि उसकी चमड़ी ही हो। फैजान ने अपना हाथ आहिस्ता-आहिस्ता जाहिरा की जाँघों पर फिराना शुरू कर दिया और उसकी जाँघों को सहलाने … Read more